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आओ मनाएं एक नयी दीपावली

Posted On: 21 Oct, 2014 कविता,Special Days में

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एक नए उल्लास से

चलो जलाएं हम दिये जगमगाते पावन सुन्दर …

न रहे अंधेरा घर में – न रहे अंधेरा मन में

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .

अनाथ बचपन कहीं दिख जाए अगर

लिए छोटे छोटे हाथ देखता राह भविष्य की -

भर दें उसके जीवन में हम शिक्षा और उम्मीद की किरण

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .

फ़ैली हो जो हमारे आसपास

गन्दगी और प्रदूषण की बीमारी

तो बढ़ा कर हाथ लग जाएँ मिटाने में उसे

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .

अंध विश्वास और अज्ञान

लूटता हो जब जीवन का आनंद

भर दें मुक्त विचारों से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .

हमारे अपने बुजुर्ग

अगर सोचते हों कि अब क्या रहा करने को जीवन में (?)

तब उनसे मांगें उनके अनुभवों से भरा प्रेमपूर्ण हृदय – देकर उन्हें सम्मान

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .

बेटियाँ आगे बढ़ें

मिले सुरक्षा और सामान अवसर नारी को

फैला दें खुशियाँ उनके मन में

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .

जो रह गए हमारे आसपास जिन्दगी की दौड़ में पीछे

बनें हम उनके साथी – बढ़ाकर हाथ सहयोग का

रचना करें समरस समाज की -

आओ मनाएं हम ऐसी रौशनी से भरी दीपावली .



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ravinder kumar के द्वारा
October 21, 2014

राजीव जी, सादर नमन और दीपावली की शुभकामनाएं. एक दूसरे की चिंता करें, एक दूसरे से प्रेम करें, अंध विश्वास का अन्धेरा दूर हो तभी दीपावली सार्थक होगी. बेहतरीन रचना के लिए बधाई.

    rajeev dubey के द्वारा
    November 3, 2014

    रविंदर जी,  नमस्कार एवं  प्रतिक्रियाके लिए आभार. 


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