लोकतंत्र

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आदेश समझ लो !

Posted On: 27 Feb, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सुनो थोड़ी मेरे मन की भी
ओ सरकार मेरे …
भटक रहे हैं हम कबसे
गुहार लिए ।

 

थोड़ी हमारी जरूरत है
फिर भी इतनी तकलीफ !
बड़ा बहुत प्रताप तुम्हारा
तुम सरकार बड़े ।

 

हमको थोड़ी रोटी दे दो
मेहनत हम कर लेंगे
थोड़ा हमको पानी दे दो
हम खुद भर लेंगे ।

 

एक छत की कमाई दे दो
हम जी लेंगे
बिटिया का स्कूल दे दो
बच्चे पढ़ लेंगे ।

 

बिजली दे दो
सड़क दे दो
बदले में हम खट लेंगे
जीवन से भी लड़ लेंगे ।

 

तुम्हारे दफ्तर का
भ्रष्टाचार न अच्छा
गांधी बाबा का
अपमान न अच्छा ।

 

भगत सुभाष
का मान रख लो
भारत का अभिमान
रख लो ।

 

हम न जानें
राजनीति को
पर हम जानें
यह देश हमारा ।

 

राम लला का
कृष्ण और गौतम का
अल्लाह के प्यारों का
नानक का – ईसा के दुलारों का ।

 

अबकी हमरी बात रख लो
हुई देर अब
बात बढ़ी अब
विश्वास को रख लो ।

 

सीधे हैं हम
चुप रहते हैं
मानी हैं
सब कुछ सहते हैं ।

 

पर भारत तो भारत है
देखो यह इक ताकत है
जो उठती जाती है
अब बदलाव चाहती है ।

 

इसको आजमाने का
लाभ नहीं -
शीश यहाँ झुक जाते हैं
या फिर कट जाते हैं … !

 

इस जन मंदिर की
बात रख लो -
समझ गए हो तो,
आदेश समझ लो !

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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
March 6, 2011

देश में परिवर्तन की पुकार लिए आपकी सशक्त रचना.

    rajeevdubey के द्वारा
    March 6, 2011

    निशा जी, प्रतिक्रिया पर हार्दिक आभार.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
March 2, 2011

राजीव जी, आपकी यह पुकार,ललकार और हुंकार केन्द्र की चूलें हिलाने की क़ुव्वत रखती है|

    rajeev dubey के द्वारा
    March 3, 2011

    वाहिद जी, आभार… आज ही यह रचना मुद्रित रूप में प्रकाशन के लिए भेजी है…

allrounder के द्वारा
February 28, 2011

भाई राजीव जी, नमस्कार देशहित की बातें करती एक और उत्तम कृति पर हार्दिक बधाई !

    rajeevdubey के द्वारा
    March 1, 2011

    सचिन जी, बहुत बहुत आभार…थोड़ी देर पाहिले ही देर रात मुम्बई से लौटा तो आप सबकी प्रतिक्रियाएं देख मन प्रसन्न हो गया और उत्साह से सबका जवाब लिखने बैठा…आपकी प्रतिक्रया तक पहुँच ही गया आखिरकार…

K M Mishra के द्वारा
February 28, 2011

बहुत हो गया अब मान रख लो, लोकतंत्र की आन रख लो । . मिस्र, लीबिया, चीन भी उबले हमारी सहिष्णुता की लाज रख लो । . यह भारत हम भारतवासी सदियों का इतिहास जीकर वर्तमान में थके हारे यात्री । . हमको न अब और सताओ खड़े होते है अब चेत जाओ । . प्रजातंत्र का मान रख लो लोकतंत्र की आन रख लो । राजीव जी को सादर प्रणाम ।

    rajeevdubey के द्वारा
    March 1, 2011

    मिश्र जी, इस भावपूर्ण और जोशीली प्रतिक्रिया पर बहुत बहुत आभार… संघर्ष होगा जरूर, वैचारिक धरातल तैयार हो रहा है

आर.एन. शाही के द्वारा
February 28, 2011

एक और सिक्सर दुबे जी । धुआंधार बल्लेबाज़ी का एक और उत्कृष्ट प्रदर्शन । बधाई ।

    rajeevdubey के द्वारा
    March 1, 2011

    शाही जी, लेकिन टाई नहीं होने देंगे… बौलिंग भी जबरदस्त करेंगे …

RajniThakur के द्वारा
February 28, 2011

राजीव जी, आम आदमी की विवशताओं को स्वर देती बेहतरीन पोस्ट..बधाई.

    rajeevdubey के द्वारा
    March 1, 2011

    रजनी जी, प्रतिक्रिया पर आभार… आम आदमी चेतावनी भी दे रहा है…

baijnathpandey के द्वारा
February 28, 2011

इस जन मंदिर की बात रख लो – समझ गए हो तो, आदेश समझ लो ! _______________________ जनमानस की भावनाओं को शब्द देती संदेशपरक कविता ,,,,,,,साधुवाद

    rajeevdubey के द्वारा
    February 28, 2011

    बैजनाथ जी, आभार… इन भावनाओं को साकार रूप देना है …

shab के द्वारा
February 28, 2011

पर भारत तो भारत है… बहुत खूब राजीव जी बहुत अच्छी रचना ….बधाई हो आपको……….

    rajeevdubey के द्वारा
    February 28, 2011

    शब् जी, रानी झांसी इस भारत में ही तो हुई थीं… यदि हम चाह लें तो बदलाव आ सकता है देश में

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 28, 2011

राजीव जी नमस्कार,वर्तमान हालात के जमीनी हकीकत को दर्शाती सुन्दर पंक्तियाँ,धन्यवाद!

    rajeevdubey के द्वारा
    February 28, 2011

    धर्मेश जी, इस जमीनी हकीकत को बदलना है, युवा शक्ति लगेगी…, आभार

vinitashukla के द्वारा
February 28, 2011

वर्तमान परिस्थितियों में जिसकी जरूरत है, ऐसी ही क्रांति का शुभ आह्वान करती हुई सुन्दर कविता . बधाई.

    rajeevdubey के द्वारा
    February 28, 2011

    विनीता जी, सच ही कहा, जरूरत है जन क्रांति की…, आभार

Amit Dehati के द्वारा
February 28, 2011

आदरणीय भ्राता श्री राजीव जी प्रणाम !!!! वाह क्या बात है बहुत सुन्दर प्रस्तुति !! बधाई स्वीकारें !!!!!! http://amitdehati.jagranjunction.com/2011/02/12/%E0%A4%AD शुक्रिया !

    rajeevdubey के द्वारा
    February 28, 2011

    अमित जी, रचना पसंद आई यह जान कर हर्ष हुआ, आभार…

aftab azmat के द्वारा
February 27, 2011

राम लला का कृष्ण और गौतम का अल्लाह के प्यारों का नानक का – ईसा के दुलारों का बहुत अच्छी रचना…बधाई…

    rajeev dubey के द्वारा
    February 27, 2011

    आफताब जी, आपको रचना अच्छी लगी यह जान कर हर्ष हुआ …आपकी प्रतिक्रिया पर आभार…

rajkamal के द्वारा
February 27, 2011

प्रिय राजीव जि ….नमस्कार ! अगर मैं नेता होता तो हवा के रुख को भांपते हुए इस अनुरोध कम से आपकी अति उत्तम भावों को लिए हुए कविता एक गरीब मगर आम आदमी की जरूरतों तथा उसके मन में पनप रहे आक्रोश के निर्णायक पलो को ब्यान करती हुई ….. बहुत -२ मुबारकबाद

    rajkamal के द्वारा
    February 27, 2011

    अगर मैं नेता होता तो हवा के रुख को भांपते हुए इस अनुरोध कम  आदेश को तुरन्त ही मान लेता ……

    rajeevdubey के द्वारा
    February 27, 2011

    राजकमल जी, न जाने क्यों अब इंतज़ार का मन नहीं करता…लगता है आन्दोलन की घड़ी आ रही है … आपने भी देखा होगा, हमारे लोगों की हालत अच्छी नहीं है…

    charchit chittransh के द्वारा
    February 28, 2011

    राजीव जी , राजकमल जी , समस्त जी ; क्या करना चाहिए से ही काम नहीं चलने वाला क्या …. आन्दोलन की घड़ी में क्या योगदान कर सकते हैं ? करना चाहते हैं ?swasasan.in अथवा मेरे मेल आई डी अवश्य लिखने का कष्ट कीजिये !

    rajeevdubey के द्वारा
    March 1, 2011

    चर्चित चित्रांश जी, मैं हर सहयोग करने को प्रस्तुत हूँ…जहाँ अवसर मिलता है बोलता भी हूँ…अभी भोपाल आया था एक कवि सम्मलेन में और युवाओं को ललकारा भी था, लोग सुन रहे हैं , समझ रहे हैं , एक जुट होने की जरूरत है…भोपाल आऊँगा अप्रैल प्रथम सप्ताह में, मिल कर रूपरेखा बनाते हैं, एक जन सभा आयोजित करते हैं और बात आगे बढाते हैं…

Ramesh bajpai के द्वारा
February 27, 2011

हमको थोड़ी रोटी दे दो मेहनत हम कर लेंगे थोड़ा हमको पानी दे दो हम खुद भर लेंगे । राजीव जी आम आदमी की जरुरत को आपने खूब सुरती से शब्द दिए है | बधाई

    rajeevdubey के द्वारा
    February 27, 2011

    बाजपेयी जी, प्रतिक्रिया के लिए आभार… आवाज़ भी दे सकूँ तो संतोष होगा…


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