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ओ सपनों के सौदागर ...

Posted On: 9 Feb, 2011 में

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ओ सपनों के सौदागर तू दूर देश से आ जा,
मेरी अकेली रातों को कुछ स्वप्न बीज दे जा |

 

जब गहराए धरा पर काला अमिट अँधेरा
तब रोपा जाये निशा भूमि में स्वप्न बीज मेरा |

 

स्वप्नों के नन्हे पौधे निकलें चांदनी के पोषे ,
और झूम हवा में फिर उनमें तारासम कलियाँ नन्हीं फूटें |

 

हों अनगिन व्यापार फिर उन स्वप्न वृक्षों की छांवों में ,
टूटें मन, दुःखी तन और टीस उठे फिर घावों में |

 

कभी उदास फिर हास उलास अरु आश निराश का हो फेरा,
तो कभी चमकीली आँखें ले चिड़ियाँ आ डालें डेरा |

 

पर सजल हों न आँखें मेरी जब उठे नींद का डोला ,
ओ सपनों के सौदागर, लगा तू, ऐसे सपनों का मेला |

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RajniThakur के द्वारा
February 10, 2011

हे मेरे स्वप्न तुझे , कठोर धरा से तनिक चोट न पहुंचे,यही मनाऊं तू मेरी आँखों से नहीं, मैं तुझसे जानी जाऊं.. बहुत पहले यह कविता लिखी थी , आपकी रचना ने मुझे उसकी याद दिला दी…बेहतरीन पोस्ट.

    rajeev dubey के द्वारा
    February 10, 2011

    रजनी जी, प्रतिक्रिया पर आभार…अनुगूंज हो तो, काव्य सफल होता है…

rajkamal के द्वारा
February 9, 2011

प्रिय राजिव जी …नमस्कार काश कि हर प्यार के प्यासे को अपना -२ सपनो का सौदागर मिल पाता तो फिर यह दुनिया कितनी हसीन हो जाती ….

    rajeev dubey के द्वारा
    February 10, 2011

    राजकमल जी, आपकी बात सच है…लेकिन वैसे भी यह संसार स्वप्नवत ही है, और विभिन्न व्यापार चलते ही रहते हैं, हाँ अगर हम इन व्यापारों में रमते हुए भी जीवन सकारात्मक स्वीकृति के साथ जी लें तो सुबह आ सकती है…

आर.एन. शाही के द्वारा
February 9, 2011

सारगर्भित रचना राजीव जी, बधाई ।

    rajeev dubey के द्वारा
    February 10, 2011

    सैनी जी, आपकी प्रतिक्रिया पा हर्ष हुआ…

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 9, 2011

सपनों के सौदागर से किया गया यह आग्रह बहुत ही सुन्दर बन पड़ा है| ************************************* एक आग्रह मेरा भी था इसे देख लें.. http://kashiwasi.jagranjunction.com/2011/02/07/बस-कुछ-ही-दूर-valentine-contest/

    rajeev dubey के द्वारा
    February 10, 2011

    धन्यवाद वाहिद जी…

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 9, 2011

खूबसूरत रचना व खूबसूरत भाव ………

    rajeev dubey के द्वारा
    February 10, 2011

    पियूष जी, प्रतिक्रिया पर आभार.

nishamittal के द्वारा
February 9, 2011

भावपूर्ण रचना के लिए बधाई दुबे जी.

    rajeev dubey के द्वारा
    February 9, 2011

    निशा जी, आपकी प्रतिक्रया आपकी सद्भावना का प्रतीक है, बहुत बहुत आभार…


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