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वह सुभाष था ...

Posted On: 30 Nov, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सुभाष चन्द्र बोसवह सुभाष था, वह शोला था

सुलगा था उन काली रातों में

गगन चूमती देश प्रेम की

लपटें दहकाईं भारत में ।

 

 

वह सुभाष था, उसने ललकारा था

लड़ता था – वह बढ़ता जाता था

दौड़ा फिरता था, रे जन, तेरे हित में

वह भारत का उजियारा था ।

 

 

अपना था, वह प्यारा था

सुन उसकी पुकार आज़ादी की 

जन जन बलिदानी बनता जाता था

हिन्द के उस दीवाने का ‘जय हिन्द’ जोशीला नारा था ।

 

 

जंगल-जंगल बस्ती-बस्ती

वह यूँ ही गायब हो जाता था

गज़ब थी हस्ती उस बलिदानी की

वह सेना ले कर आता था ।

 

 

कहते हैं उसके होने भर से

जनता रोमांचित हो जाती थी  

‘चलो दिल्ली’ के नारे पर

अंग्रेज़ों का शासन हिल जाता था ।

 

 

वह सुभाष था, वह अपना था

आओ, उसको याद करें हम

नव-भारत की रचना में

गौरवशाली राह चलें हम । 

 

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सुभाष की जन्म तिथि जरूर याद रखें: जनवरी 23,   1897

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajeev dubey के द्वारा
November 30, 2010

आप सभी की मेरे लेखों पर यह अपनेपन से भरी प्रतिक्रियाएँ मुझे अद्भुत शक्ति एवं साहस देती हैं, मुझे विश्वास है कि हिन्द के चाहने वाले आने वाले समय में एक बदलाव लाएँगे। इस लोकतान्त्रिक व्यवस्था में जनमत की शक्ति के द्वारा परिवर्तन की शुरुआत की जा सकती है। मिश्रा जी, चातक जी, प्रिया जी, ब्रज किशोर जी, एवं निशा जी, आप सभी को मेरा आभार ।

K M Mishra के द्वारा
November 30, 2010

दुबे जी सादर वंदेमातरम ! जागरण जंक्शन पर एक राष्ट्रवादी कवि का उदय हुआ है । हम उसका अभिनंदन करते हैं । सुभाष बाबू को सरकारें जितना भुलाना चाहें लेकिन हमारे दिलों में जो स्थान सुभाष बाबू और सरदार पटेल के लिये है वो गांधी और नेहरू कभी नहीं ले सकते । आभारी हूं ।

chaatak के द्वारा
November 30, 2010

नेताजी की यादें फिर से ताज़ा कराने का बहुत बहुत शुक्रिया! हमें नेताजी जैसे देशभक्तों को स्वयं से याद रखना ही होगा क्योंकि देश की चरित्रहीन सरकार जो मैमूना बेगम के जन्मदिन को जबरदस्ती हम पर थोपती है उसी दिन महारानी लक्ष्मीबाई का नाम तक भूल जाती है यूँ कहें जान बूझ कर दबा देती है ताकि हमें कहें दोनों के बीच जमीन आसमान सा अंतर न समझ में आ आ जाए| इस अलख को इसी प्रकार से जलाये रखें| वन्दे-मातरम्!

priyasingh के द्वारा
November 30, 2010

बेहतरीन कविता……….

braj kishore singh के द्वारा
November 30, 2010

राजीव जी सिर्फ सुभाष बाबू को यद् करने से नहीं काम चलेगा बल्कि उनके जैसा बनाने का प्रयास करना पड़ेगा.आज के भारत को एक नहीं अनगिनत सुभाष के बलिदानों की आवश्यकता है.

nishamittal के द्वारा
November 30, 2010

तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा का नारा देने वाले वीर सेनानी सुभाष को कैसे भूला जा सकता है धन्यवाद आज हमे ऐसी ही क्रांतिकारी वीरों की आवश्यकता है.


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