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आह्वान

Posted On: 28 Nov, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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जनमत जनशक्ति साथ हो

राष्ट्रप्रेम की अनुभूति लिए तब

करते सेवा जन – जन  की

तुम आना रण विजय घोष को ।

 

 

रोको उन बेगानों को जो नहीं मानते…

करते स्वागत द्रोही जन  का वे 

और बेचते नित राष्ट्र हमारा

स्वार्थ लोलुप बन बाज़ारों में ।

 

 

जनमत जनशक्ति साथ हो

भर हुंकार उठा पतित को

समरस समाज की रचना कर

तुम आना रण विजय घोष को ।

 

 

कितना लहू  बहाया

कितना दुःख उठाया

उन देशभक्त दीवानों ने स्वातंत्र्य अग्नि में

निज को होम चढ़ाया ।

 

 

जनमत जनशक्ति साथ हो

उठा कदम निश्चय से भर

तुम निडर बढ़ जाना पथ पर

ओ भारत के रक्षक।

 

 

दहके थे वे शोला बन कर

उन पराधीन, काली रातों में

भेजे थे बच्चे माँओं ने

चढ़ने को भेंट, छुपा कर आँसू ।

 

 

 

जनमत जनशक्ति साथ हो

आगे बढ़ फिर थाम तिरंगा

तुम बनना ढाल जन-जन की

ओ नवयुग के सेनानी ।

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
November 29, 2010

क्या बात है राजीव जी, दिल जीत लिया आपने! इतनी अच्छी कविता पर हार्दिक बधाईयाँ!

K M Mishra के द्वारा
November 29, 2010

जनमत जनशक्ति साथ हो आगे बढ़ फिर थाम तिरंगा तुम बनना ढाल जन-जन की ओ नवयुग के सेनानी । बिहार ने दिखा दिया अब देश की बारी है । एक बार फिर जनता और देश से जुड़ी कविता के लिये आभारी हूं ।

roshni के द्वारा
November 29, 2010

राजीव जी तुम बनना ढाल जन-जन की ओ नवयुग के सेनानी .. देशप्रेम की भवन से भरी बहुत अच्छी रचना धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
November 29, 2010

राजीव जी देशप्रेम की भावना को एक बार से ऊष्मा देती रचना, वास्तव में हमें इस तरह की रचनाओ की सख्त आवश्यकता है ताकि समाज को …… सुन्दर रचना के लिए बंधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

allrounder के द्वारा
November 29, 2010

देशप्रेम से ओतप्रोत अच्छी रचना के लिए बधाई हो राजीव जी !

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 29, 2010

राजीव जी,बीरों पर रचित लाईने,मेरे तरफ से उन बीरों को नमन,धन्यवाद!

sushma के द्वारा
November 29, 2010

राजीव एक रचना,एक उदघोष सिर्फ आपके विचार नहीं वरन हमारे भी है. अति सुंदर रचना.बधाई के पात्र है आप. उन सच्चे वीरो के लिए हमारे हिर्दय में अपर सम्मान है.

nishamittal के द्वारा
November 29, 2010

उन शहीदों,वीरों को हमारा भी नमन दुबे जी.


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