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मेरे कश्मीर की मिट्टी ...

Posted On: 26 Nov, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सवालों के घेरे में हैं रिश्ते
और हवाओं में खुशबू कम हो रही है
मेरे कश्मीर की मिट्टी न जाने क्यों लाल
और फिजाँ गमगीन हो रही है ।

 

जुड़ा है हिंदुस्तान का दिल इस कदर
ऐ मेरे कश्मीर तुझसे
कि अलगाव की बात सुन
आंखों से बरसात हो रही है ।

 

कश्मीर हमारा भी है
यह कहने में मुझको क्या झिझक ऐ दोस्त
कश्मीर तुम्हारा ही है
यह सुना तबसे जिंदगी खामोश सी हो गई है ।

 

सौ करोड़ से ऊपर हैं हम हिन्दुस्तानी
क्या लड़ें आपस में अब इस बात पर
कि श्रीनगर की पहचान अलग है… (?)
खुदा का नूर बाँट कर ये हो तो हो, नहीं, तो हरगिज़ नहीं ।

 

झेलम और डल झील बचपन से मेरी और तुम्हारी रही है
शिकारे अलग अलग हैं तो क्या हुआ
आज़ादी तुमको मुझसे कैसे मिलेगी मेरे दोस्त
जब गुलामी मैंने दी ही नहीं ।

 

अब न करो फिर से बात बाँटने की
हिन्दुस्तान गमगीन हो उठा है
कफन और नहीं बेचे जाते इन दुकानदारों से
दरगाह पर चादरें चढ़ाना ज्यादा अच्छा लगता है ।

 

साझी विरासत है हमारी
साथ चलना ही भला है
मस्जिदों में दुआ और मंदिरों में पूजा होती रहे
कश्मीर हमारा है – हर धड़कन पर दिले हिंदुस्तान  यही कहता है ।

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajeev dubey के द्वारा
January 22, 2011

###################### today i see this poem on Sudarshan News Channel in Bindas boll program, was very very nice presented by Suresh Chavhanke, and he also thanks Jagaranjunction so i visit it on this page. poem is veer nice and Bindas boll too Narayan ###################### नारायण जी, सूचना के लिए धन्यवाद, यह जान कर अच्छा लगा … मेरी कोशिश है कि हमारी आवाज़ इतनी ऊंची और जोशीली हो कि हिंद के चाहने वाले खड़े जाएँ …हम किसी भी हालत में देश को तोड़ने की इजाज़त नहीं देंगे …!

div81 के द्वारा
November 30, 2010

कफन और नहीं बेचे जाते इन दुकानदारों से दरगाह पर चादरें चढ़ाना ज्यादा अच्छा लगता है । बहुत खूब

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 28, 2010

कश्मीर हमारा भी है यह कहने में मुझको क्या झिझक ऐ दोस्त कश्मीर तुम्हारा ही है यह सुना तबसे जिंदगी खामोश सी हो गई है । सुंदर रचना ………….. हार्दिक बधाई………..

K M Mishra के द्वारा
November 27, 2010

साझी विरासत है हमारी साथ चलना ही भला है मस्जिदों में दुआ और मंदिरों में पूजा होती रहे कश्मीर हमारा है – हर धड़कन पर दिले हिंदुस्तान यही कहता है । देश की आवाज । आभार ।

    Narayan के द्वारा
    January 22, 2011

    today i see this poem on Sudarshan News Channel in Bindas boll program, was very very nice presented by Suresh Chavhanke, and he also thanks Jagaranjunction so i visit it on this page. poem is veer nice and Bindas boll too Narayan

    rajeev dubey के द्वारा
    January 22, 2011

    नारायण जी, सूचना के लिए धन्यवाद, यह जान कर अच्छा लगा … मेरी कोशिश है कि हमारी आवाज़ इतनी ऊंची और जोशीली हो कि हिंद के चाहने वाले खड़े जाएँ …हम किसी भी हालत में देश को तोड़ने की इजाज़त नहीं देंगे …!


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