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और आप चुप हैं राहुल जी...

Posted On: 25 Nov, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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Yuvaraj - Rahulप्रश्नों के दायरे बढ़ रहे हैं,

और आवाजें फुसफुसाहटों से कोहराम में बदल रही हैं ।

‘कलावती’ का नाम लेकर संसद में तालियाँ तो बज़ गईं,

और ‘कलावती’ को कुछ रुपये भी मिल गये होंगे – सहायता के नाम पर ।

 

अब उसी ‘कलावती’ और उस जैसों के हजारों करोड़ लुट गए दिल्ली की निगरानी में – खेल खेल में,  

और आप चुप हैं राहुल जी ।

इसे आपकी नियत का खोट कहें हम, या अयोग्यता का नाम दें,

पर हमें यह न कहिएगा कि यह केवल अफसरों की करामात थी, या कि आप अंजान हैं ।

 

दूरसंचार के घोटालों में भी,

हम बेचारे नागरिक देखते रहे दूर – दूर से ….  ।

और लुटते रहे हमारे हक के पैसे आपकी सरकार के मंत्रियों की निगरानी में,

अब बैठ जाएगी कोई जाँच और हम करेंगे एक अंतहीन  इंतजार ।

 

अब न कहिएगा हमसे कि,

यह तो मनमोहन जी जानें ।

सोनिया जी की कितनी ज्यादा चलती है,

यह हम सब – ‘कलावती’ और ‘नत्थू लाल’ – अच्छी तरह से पहचानें ।

 

प्रश्नों के दायरे बढ़ रहे हैं,

और आवाजें कोहराम से नारों में बदल रही हैं ।

कारगिल के नाम पर बनी इमारत की नींव के नीचे,

दफन कर दी आपकी सरकार ने सारी नैतिकता सरकार चलाने की, और आप चुप हैं !

 

महँगाई की मार झेल-झेल कर सुन्न पड़ गई जनता की जीभ,

और आप हैं, कि चले आते हैं तसला लेकर मिट्टी उठाने – बनाने को हमारा मजाक ।

अच्छा लगता हमें अगर सस्ती होती दाल,

और मिल जाता दो वक्त थोड़ा प्याज मेहनत का – अपना तसला तो हम खुद भी उठा लेते ।

 

प्रश्नों के दायरे बढ़ रहे हैं,

और आवाजें नारों से आंदोलनों में बदल रही हैं …।

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shailandra singh के द्वारा
November 27, 2010

महँगाई की मार झेल-झेल कर सुन्न पड़ गई जनता की जीभ……. राजीव जी सही नब्ज पकड़ी है हम ही और मीडिया तो हाई लाइट करता है राहुल और सोनिया को यह दोष मात्र अपना है जो रातो रात हीरो बना देते है और फिर ……..? जंगल मै मोर नाचा किशने देखा……… पर हमें जो दिखाया जाता है वोही सच नहीं होता. एह तो नजरो का धोका है जो फस गया गया काम से? बढ़िया कटाक्ष है शायद राहुल जी सुन ले आपके शब्दों को बधाई हो. शैलन्द्र सिंह नवी दिल्ली 44

rajeevdubey के द्वारा
November 26, 2010

आप सबकी सहृदयता एवं प्रोत्साहन के लिए आभार। स्वतः स्फूर्त भावों की अभिव्यक्ति के रूप में कविता सामयिक विषयों को तीव्र रूप में उभार कर जन चेतना को जगा सकती है । आशा है मैं आप सबसे यह सुखद संवाद बनाए रख सकूँगा ।

div81 के द्वारा
November 26, 2010

राहुल बाबा तो वो ही बोलेंगे जो उनको बोलने के लिए कहा जायेगा राहुल बाबा प्रधानमंत्री बनने का सपना जो देख रहे है | इस लिए सपनो से जगाना ठीक नहीं | अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    rajeevdubey के द्वारा
    November 27, 2010

    दिव्या जी , धन्यवाद ।

Dr S Shankar Singh के द्वारा
November 26, 2010

ये सल्तनत के वारिस हैं. इनको देश की, जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है. यह परिवार यूरोपियन स्टाइल में रोड शो करके चिकनी चुपड़ी, भोली सूरत दिखा कर, नारों के सहारे, हवा बनाने के लिए मीडिया को खरीदकर सत्ता हथियाना चाहता है. प्रधानमंत्री की गद्दी पर ये अपना पुश्तैनी अधिकार समझते हैं.

    rajeev dubey के द्वारा
    November 27, 2010

    डॉ सिंह साहब, हमें जन जागरण का कार्य करते रहना होगा ।

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 26, 2010

नमस्ते राजीव दुबे जी,सबसे पहले तो जागरण के इस मंच पर आपका स्वागत है,आपसे एक निवेदन है भाई शाहब अभी तो इन लोगों को बिहार की जनता ने जोर का झटका जोर से दिया है बोलती वैसी ही बंद है ऊपर से आपने इतने सवाल एक साथ दाग दिए,वैसे सवाल पूछने के समय का चुनाव सही किया है आपने,लेकिन शायद बेहतर यही होगा इन लोगों से सवाल आज जैसे बिहार की जनता ने पूछा है वैसे ही पूछा जाय की ताकि ये उत्तर ही न दे सके,धन्यवाद!

    rajeev dubey के द्वारा
    November 27, 2010

    धर्मेश जी, आभार ।

chaatak के द्वारा
November 26, 2010

राजीव जी, सवालों का दायरा वाकई बढ़ रहा है बेचारे अपने बोले और रचे झूठ से बेनकाब होते मायनों (नेहरू कहाँ उचित होगा क्या?) के वंशज बिहार में अपनी पार्टी का तिया-पांचा किस तरह हज़म कर रहे होंगे इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है| बड़ी मोटी खाल वाले हैं ये आधे अँगरेज़ (इटालियन या क्षद्म पारसी भी जोड़ दें तो क्या हर्ज़ है)| सोनिया (एंटोनिया ठीक होगा क्या?) जब प्रधानमन्त्री बनने के नाम पर राष्ट्रपति भवन से अपना सा मुंह लेकर लौटी थीं तब उन्होंने त्याग का नाटक करके जनता को बहुत हद तक बेवक़ूफ़ बना लिया था लेकिन इस बार जनता शायद अपनी पिछली गलती दोहराने के लिए तैयार नहीं| बिहार चुनाव तो बानगी है| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    rajeev dubey के द्वारा
    November 27, 2010

    चातक जी, आपके कटाक्ष अचूक हैं । धन्यवाद ।

kmmishra के द्वारा
November 26, 2010

रा उर विन्ची के कानों को यह सब सुनाई नहीं देगा । लेकिन उन्हें बिहारियों का वह रहपट हमेशा याद रहेगा जो उनके कान के नीचे पड़ा है । कविता बहुत ही सुंदर बन पड़ी है । जब कविता देश और समाज के इतनी नजदीक हो तब वह आत्मा की आवाज बन जाती है । बहुत बहुत आभार ।

    kmmishra के द्वारा
    November 26, 2010

    दुबे जी हिंदी ब्लागिंग की दुनिया में आपका स्वागत है । हिंदी को अंतरजाल पर समृद्ध करने में अपना योदगान दें । आपकी कविताओं और लेखों का बेसब्री से इंतजार रहेगा । आभार ।

    rajeev dubey के द्वारा
    November 27, 2010

    मिश्रा जी, जरूर। मैं अपनी कविताओं एवं लेखों को सुधीजनों के समक्ष प्रस्तुत करता रहूँगा ।

nishamittal के द्वारा
November 26, 2010

प्रथम पोस्ट के द्वितीय प्रतिक्रिया के रूप में अच्छी पंक्तियों के लिए बधाई.

    rajeev dubey के द्वारा
    November 27, 2010

    धन्यवाद निशा जी ।

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 25, 2010

अब न कहिएगा हमसे कि, यह तो मनमोहन जी जानें । सोनिया जी की कितनी ज्यादा चलती है, यह हम सब – ‘कलावती’ और ‘नत्थू लाल’ – अच्छी तरह से पहचानें । ओर ये तो अब बिहार के चुनावों से साबित भी हो गया है………… बढ़िया लेख हार्दिक बधाई……………

    rajeev dubey के द्वारा
    November 27, 2010

    पीयुष जी, आपको धन्यवाद । आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी ।


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